
लोकसभा चुनाव 2024। चुनावों की सरगर्मियों के बीच जनता में चहल-पहल बढ़ी हुई है। नारों की गहमागहमी भी बढ़ी हुई है। जन आंदोलन को उद्बोधित करते हैं ये आकर्षक नारे। हर राजनीतिक दल के अलग अलग नारे।
प्रस्तुत हैं कुछ क्षणिकाएं ————-
१. अबकी बार
बढ़ी हुई है 2024 लोकसभा चुनावों की सरगर्मियां,
वादों के रथों पर सवार नेताओं की गलबहियाँ।
पूछती है सरकार,
हमें क्या चाहिए अगली बार ?
चलो देखें हम क्या पाएं इस बार?
अबकी बार केवल मोदी सरकार,
हो जाए इस बार मिलावट पर वार,
मुक्त हो अशुद्धता से विचार और आहार,
हमें चाहिए रामराज्य और कृष्ण शास्त्र।
ज़रूरी नहीं समस्त विदेशी विचार,
पूर्ण हैं, संपूर्ण हैं हमारे संस्कार।
आँकड़े करेंगे चार सौं पार ।
अनुगमन कर के देखो तो एक बार,
समझ सकोगे संसाधनों
और व्यक्ति के सम्मान का अर्थ,
सावरकर के त्याग
बोस के कर्म का अर्थ।
देश का सम्मान मोदी सरकार,
अबकी बार आँकड़ें 400 पार।
चाणक्य ने निकाले थे फसलों से पौधे काँटेदार,
शून्य हो जाएं मातृभूमि से गद्दार।
जनता है नत मस्तक बार बार,
विश्वास अपरंपार,
अबकी बार अवश्य ही 400 पार।
वन की सुखिया हो या गांव की रमिया,
या हो वो शहर की तान्या।
नारी वंदन की उठी है पुकार,
नहीं हैं ये चाटुकारिता और चापलूसी,
ये तो बस हैं दिल के उद्गार।
अब की बार मोदी सरकार 400 पार।
२. सब कुछ सीखा हमने
लोकसभा 2024 चुनावों के मद्देनजर, वादों के हल्लाबोल के बीच से कहीं स्वयं के अंदर झाँका, तो एक चीखती हुई सी आवाज आई। गौर फरमायें ….
सब कुछ सीखा था हमने, न सीखी समझदारी।
सच है दुनियावालों, की हम तो थे अनाड़ी ।
लोकतन्त्र के वाहक हम, पर न ली थी जिम्मेदारी।
लूट रहा था चमन हमारा,
नींद थी हमारी भारी।
लो अब टूट चली है खुमारी,
नींद कुंभकर्ण सी प्यारी ,
और टूट गया है आलस भारी।
सोने की चिड़िया चहक उठी है,
सुन लो दुनिया सारी।
वोट देने जाएंगे हम,
सुख संतुष्टि की है बारी।
३. जीवित है आशा हमारी
चुनावों की हलचल बढ़ चलीं हैं,
बयानों की हो रही रस्साकशी।
सुख हम जो पा न सके आजतक,
सोचती हूँ हम में थी क्या कमी?
सदियों का इतिहास कहता रहा था चीख चीख कर,
लोकतंत्र के वाहकों, झाँको अपने अंदर,
अपने मन के भीतर।
मतदान तुम्हारा धर्म था,
न बनाया होता इसका मजाक,
बेटियाँ होतीं और सुरक्षित,
सुरक्षित होता तुम्हारा संसार।
चलो खुश हैं आज हम तो,
समझ चुके हैं मत की महिमा,
सही मतदान का धर्म अगर किया पूरा,
तो उत्सव का होगा समाँ,
एक ही दिशा हो और एक ही सोच,
राष्ट्र की सुरक्षा और संस्कृति की रक्षा,
सिर्फ यही हो सोच हमारी निःसंकोच।
जीत जाएंगे हम,
उन्नति होगी सर्वांगीण,
सुख और समृद्धि आएगी,
होगा नारी का सम्मान।
रक्षित होगा हमारा वतन,
सुरक्षित होगा हमारा संसार।